Thursday, 10 March 2011

यकीनन यकीं है मुझे, मैं तुमपे ऐतबार करता हूँ;
न कर सकूँगा मगर मौत के आने के बाद।
tumhe bhi wada karke mukar jane ki aadat hai;
mujhe bhi aitbar karne ki kuch kam to nahi.
अगर होता इश्क का कही पैमाना कोई;
न होता जहाँ में फिर कही मैखाना कोई ।
मैं ढूढता फिरता हूँ तुम्हे जो इन गलियों में;
लोग कहते हैं होगा यहीं वो दीवाना कोंई।

Monday, 7 March 2011

maine socha wo samajh lega meri mohabbat ko;
per mujhe hi ab samajhna pada uski bewafai ko.
sochta hoon lag jaye ye dil kisi mahfim me magar;
darta hoon yad karke mahfil me uski ruswai ko.

Wednesday, 2 March 2011

unki akho me ek gahra samandar basta hai;
jinhone pyar ka matlab samjha hai.
ham to yun bhi bah gaye the waqt ke sath;
khusnaseeb hai unhone apna samjha hai।

सुंदर पुरुष, बहादुर स्त्रियाँ

धीरे-धीरे मुझे ये यक़ीन हो गया है की दुनिया के सारे सुंदर पुरुष खाना पकाने में कुशल होते हैं क्यों की सुंदर वही होता है जो भीतर मन से पका ह...