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Showing posts from May, 2011

मैं पतंग

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हमारेमित्रनिशांतजीनेआग्रहकिया ................"हो सके तो कभी उस मज़बूरी को भी कविता में बयाँ कीजिए, जहाँ पतंगे आसमान में उड़ने से थक हार कर जमीन में अपने उड़ाने वाले हाथों में लौटना चाहता है, लेकिन अमूमन समय की आंधी में उसकी परिणीति कट कर किसी कोने में विलुप्त हो जाने में होती है।" येगीतउनकेलिए ........

मैंपतंगतूँमुझकोउड़ाये;
दूरमुझेलेजायेंहवाएं।
प्रेमडोरसेतुझसेजुड़ीमै;
सोचूँकबवापसतूँबुलाये।

मैंजोतुझसेमिलनाचाहूँ;
डोरतूँख़ीचे बस यहीउपाय।
डोरकहींकटजाएअगरतो;
वक़्तकेझोकेंदूरलेजायें।

तेरेएकइशारेपरमैं;
इठलाउँइतराउँहाय!
दूरमैंतुझसेहवासेलड़ती;
दर्दमेराकोईसमझनपाये।

मुकद्दर

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वोमुकद्दरमेंहैनहींमेरे;
कहनपायाहमतोहैंतेरे।

यूँ खामोशचेहरावोमुझेदीखताहै;
जैसेआइनासामनेपड़ाहोमेरे।

शामकेसाथमैभीढलताहूँ;
वोरौशनीजोसाथनहींहैमेरे।

य़ूतोकटहीजायेगाजिंदगीकासफ़र;
मौतआजायेगीचुपकेसेजहनमेंमेरे।

मै सोचताथापालूंमैमरनेकासुकून ;
कि मौतआयेपरहोउनकीबाँहोंकेघेरे।

विरह गीत

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काँहेंगयेपरदेशसजनवा ;
मनवा मोरा अधीरभवा।
देखरहेनितराहसजनके;
नयननसेनितनीरबहा।
काहेंगयेपरदेशसजनवा.....

खोजरहीमैंप्रीतकीडारी;
मनचिरियाकोठौरकहाँ।
देखतबिम्बद्वारपरजैसे;
मनसोचेहैआयेसजनवा।
काहेंगयेपरदेशसजनवा.........

सिथिल नयन और याद सजन के;
मन छाये कारे दुःख के बदरवा।
घर सारा अँधियारा जग है;
तुमको कहाँ अब ढूढे नयनवा।
काहेंगयेपरदेशसजनवा..........

बरस पड़े फिर टूट के बादल;
जब घर आये लौट सजनवा।
लिपट गये तन प्रेम में आतुर;
जैसे मिले हों नदी सगरवा।
अब तो यही मैं माँगू रब से;
अब न जाये परदेश सजनवा .....

दर्द के फूल

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ख्वाबअक्सरहीटूटकेबिखरजातेहैं;
दिलकोहमदर्दकेफूलोंसेहीसजातेहैं।

रास्ताग़मकोभुलानेका है नहींकोई;
अश्कोंकेजाम से हमयेख़ुशीमनातेहैं।

मेरीआँखोंकायेपैमानाछलकजाताहै;
रातभरआँखोंमेंयूँअश्कआतेजातेहैं।

तुमनहींहोतेहोतोतुम्हारीयादसही;
हमसफ़रबनकरमेरासाथजोनिभातेहैं।

हाथ मेरे ये ग़म का खज़ाना है लगा

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हाथमेरेयेग़मकाखज़ानाहैलगा,
दुनियामुझकोयेएकवीरानाहैलगा।

दिलकीहैबाततोसमझनाभीमुश्किलहै,
रोगमुझकोजोमोहब्बतकापुरानाहैलगा।

मंजिलेऔरभीथींग़म-ए-जिंदगीकेलिये,
परमेरेदिलपेहीग़म का निशानाहैलगा।

समंदरहै, साहिलहै, हैलहरोंकासफ़र,
साहिल-ए-दिलपरयादोंकाआनाहैलगा।


(कुछ निजी व्यस्तताओं और ब्लॉग की अव्यवस्था के कारण यह पोस्ट लगाने में कुछ देर हो गया,
इसके लिए माफ़ी चाहूँगा)

कुछ यादें

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एकएहसासयहीदिलमेबसाकेरखिये,
मुझेअपना ना सही, गैरबनाकररखिये.
मैजोनज़दीकनहींतोदूरहीवाज़िब,
कु्छनही हूँ, मुझेकुछतोबनाकररखिये.

कौनसमझेगा, येदिलकेजख्महैगहरे,
उनकोबसदिलमेंछुपाकररखिये.
कौनसमझेगा अब इनअश्कोकीकीमत,
हैयेमोतीआँखोमेंछुपाकररखिये.

हौसलाहैतोगुजरजायेगाअँधेरोकासफ़र,
रोशनीहोनेतकखुदकोबचाकररखिये.
रातकटजायेगीयादों का सहारा तो है,
सुनहरीयादोंकोदिलमेबसाकररखिये.