Friday, 20 May 2011

दर्द के फूल


ख्वाब अक्सर ही टूट के बिखर जाते हैं;
दिल को हम दर्द के फूलों से ही सजाते हैं।

रास्ता ग़म को भुलाने का है नहीं कोई;
अश्कों के जाम से हम ये ख़ुशी मनाते हैं।

मेरी आँखों का ये पैमाना छलक जाता है;
रात भर आँखों में यूँ अश्क आते जाते हैं।

तुम नहीं होते हो तो तुम्हारी याद सही;
हमसफ़र बनकर मेरा साथ जो निभाते हैं।

2 comments:

  1. ख्वाब अक्सर ही टूट के बिखर जाते हैं;
    दिल को हम दर्द के फूलों से ही सजाते हैं।
    ओह! क्या बात कही है और बेहतरीन बिम्ब प्रयोग्…………बहुत सुन्दर रचना दिल को छू गयी।

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